Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7
mahabharat 3.233.27: मैं कभी किसी का अपमान करने वाली बात नहीं कहती। मैं दुष्ट स्त्रियों की संगति से सदैव दूर रहती हूँ। मैं आलस्य को कभी अपने पास नहीं आने देती और सदैव अपने पतियों के अनुकूल आचरण करती हूँ।॥27॥   |   mahabharat अध्याय 3.233: द्रौपदीका सत्यभामाको सती स्त्रीके कर्तव्यकी शिक्षा देना   ।   mahabharat पर्व 3: वन पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 3: वन पर्व  »  अध्याय 233: द्रौपदीका सत्यभामाको सती स्त्रीके कर्तव्यकी शिक्षा देना  »  श्लोक 27
 
 
श्लोक  3.233.27 
अतिरस्कृतसम्भाषा दु:स्त्रियो नानुसेवती।
अनुकूलवती नित्यं भवाम्यनलसा सदा॥ २७॥
 
 
अनुवाद
मैं कभी किसी का अपमान करने वाली बात नहीं कहती। मैं दुष्ट स्त्रियों की संगति से सदैव दूर रहती हूँ। मैं आलस्य को कभी अपने पास नहीं आने देती और सदैव अपने पतियों के अनुकूल आचरण करती हूँ।॥27॥
 
‘I never say anything that would insult anyone. I always stay away from the company of wicked women. I never let laziness come near me and I always behave in a manner that suits my husbands.॥ 27॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)