श्री महाभारत  »  पर्व 3: वन पर्व  »  अध्याय 233: द्रौपदीका सत्यभामाको सती स्त्रीके कर्तव्यकी शिक्षा देना  »  श्लोक 26
 
 
श्लोक  3.233.26 
प्रमृष्टभाण्डा मृष्टान्ना काले भोजनदायिनी।
संयता गुप्तधान्या च सुसम्मृष्टनिवेशना॥ २६॥
 
 
अनुवाद
‘मैं घर के बर्तनों को धोकर स्वच्छ रखती हूँ। शुद्ध और स्वादिष्ट भोजन तैयार करती हूँ और समय पर सबको भोजन कराती हूँ। मैं अपने मन और इन्द्रियों को वश में रखकर घर में गुप्त रूप से अन्न संग्रह करती हूँ। घर को स्वच्छ और पवित्र रखने के लिए मैं झाड़ू, पोछा और लीपापोती करती हूँ।॥ 26॥
 
‘I keep the utensils of the house clean by washing them. I prepare pure and tasty food and serve food to everyone on time. I keep my mind and senses under control and secretly store food grains in the house. I sweep, mop and whitewash the house to keep it clean and pure.॥ 26॥
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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