| श्री महाभारत » पर्व 3: वन पर्व » अध्याय 233: द्रौपदीका सत्यभामाको सती स्त्रीके कर्तव्यकी शिक्षा देना » श्लोक 22 |
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| | | | श्लोक 3.233.22  | सूर्यवैश्वानरसमान् सोमकल्पान् महारथान्।
सेवे चक्षुर्हण: पार्थानुग्रवीर्यप्रतापिन:॥ २२॥ | | | | | | अनुवाद | | कुन्तीदेवी के पाँचों पुत्र मेरे पति हैं। वे सूर्य और अग्नि के समान तेजस्वी, चन्द्रमा के समान हर्षित, महारथी, दृष्टिमात्र से शत्रुओं का संहार करने वाले तथा महान् बल, पराक्रम और तेज से युक्त हैं। मैं सदैव उनकी सेवा में तत्पर रहती हूँ॥ 22॥ | | | | ‘The five sons of Kuntidevi are my husbands. They are as radiant as the Sun and the Fire, as joyous as the Moon, are great warriors, have the power to kill enemies with just a glance and are endowed with tremendous strength, valour and glory. I am always engaged in their service.॥ 22॥ | | ✨ ai-generated | | |
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