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श्री महाभारत  »  पर्व 3: वन पर्व  »  अध्याय 233: द्रौपदीका सत्यभामाको सती स्त्रीके कर्तव्यकी शिक्षा देना  »  श्लोक 18
 
 
श्लोक  3.233.18 
वर्ताम्यहं तु यां वृत्तिं पाण्डवेषु महात्मसु।
तां सर्वां शृणु मे सत्यां सत्यभामे यशस्विनि॥ १८॥
 
 
अनुवाद
यशस्विनी सत्यभामे! मैं स्वयं महान पाण्डवों के साथ जो व्यवहार करता हूँ, वह मैं तुमसे सत्य कहता हूँ; सुनो।
 
Yashaswini Satyabhame! I am telling you the truth about how I myself treat the great Pandavas; listen.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)