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mahabharat 3.233.17: जो पापिनी स्त्रियाँ इस प्रकार पापियों का अनुसरण करती हैं, वे अपने पतियों को अनेक प्रकार के कष्टों में डालती हैं। इसलिए पतिव्रता स्त्री को चाहिए कि वह अपने पति को किसी भी प्रकार से अप्रसन्न न करे॥17॥   |   mahabharat अध्याय 3.233: द्रौपदीका सत्यभामाको सती स्त्रीके कर्तव्यकी शिक्षा देना   ।   mahabharat पर्व 3: वन पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 3: वन पर्व  »  अध्याय 233: द्रौपदीका सत्यभामाको सती स्त्रीके कर्तव्यकी शिक्षा देना  »  श्लोक 17
 
 
श्लोक  3.233.17 
पापानुगास्तु पापास्ता: पतीनुपसृजन्त्युत।
न जातु विप्रियं भर्तु: स्त्रिया कार्यं कथंचन॥ १७॥
 
 
अनुवाद
जो पापिनी स्त्रियाँ इस प्रकार पापियों का अनुसरण करती हैं, वे अपने पतियों को अनेक प्रकार के कष्टों में डालती हैं। इसलिए पतिव्रता स्त्री को चाहिए कि वह अपने पति को किसी भी प्रकार से अप्रसन्न न करे॥17॥
 
‘Those sinful women who follow the sinners in this way put their husbands in many kinds of troubles. Therefore, a virtuous woman should never displease her husband in any way.॥ 17॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)