श्री महाभारत  »  पर्व 3: वन पर्व  »  अध्याय 233: द्रौपदीका सत्यभामाको सती स्त्रीके कर्तव्यकी शिक्षा देना  »  श्लोक 11
 
 
श्लोक  3.233.11 
अनुप्रश्न: संशयो वा नैतत् त्वय्युपपद्यते।
तथा ह्युपेता बुद्धॺा त्वं कृष्णस्य महिषी प्रिया॥ ११॥
 
 
अनुवाद
तुम्हारे समान पतिव्रता स्त्री के लिए ऐसा प्रश्न करना या अपने स्वामी के प्रेम पर संदेह करना कदापि उचित नहीं है, क्योंकि तुम बुद्धिमान होने के साथ-साथ श्यामसुन्दर की प्रिय पत्नी भी हो ॥11॥
 
It is never appropriate for a chaste woman like you to ask such a question or to doubt the love of your master, since besides being intelligent, you are also the beloved consort of Shyamsundar. ॥11॥
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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