श्री महाभारत  »  पर्व 3: वन पर्व  »  अध्याय 233: द्रौपदीका सत्यभामाको सती स्त्रीके कर्तव्यकी शिक्षा देना  »  श्लोक 10
 
 
श्लोक  3.233.10 
असत्स्त्रीणां समाचारं सत्ये मामनुपृच्छसि।
असदाचरिते मार्गे कथं स्यादनुकीर्तनम्॥ १०॥
 
 
अनुवाद
सत्ये! तुम मुझसे सती स्त्रियों के आचरण के विषय में नहीं, अपितु दुराचारी और दुष्ट स्त्रियों के आचरण के विषय में पूछ रहे हो। दुराचारी स्त्रियों के आचरण की चर्चा हम कैसे कर सकते हैं?॥10॥
 
‘Satye! What you are asking me about is not the conduct of virtuous women, but that of immoral and bad women. How can we discuss the path adopted by immoral women?॥10॥
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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