Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7 mahabharat 3.232.20-21: जो ब्राह्मण एकाग्रचित्त होकर स्कन्ददेव के जन्म की इस कथा को पढ़ता है, ब्राह्मणों को सुनाता है अथवा स्वयं ब्राह्मण के मुख से सुनता है, वह धन, आयु, तेज, यश, पुत्र, शत्रुओं पर विजय और संतोष प्राप्त करके अन्त में स्कन्द लोक को जाता है ॥20-21॥ | mahabharat अध्याय 3.232: कार्तिकेयके प्रसिद्ध नामोंका वर्णन तथा उनका स्तवन । mahabharat पर्व 3: वन पर्व । श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
जो ब्राह्मण एकाग्रचित्त होकर स्कन्ददेव के जन्म की इस कथा को पढ़ता है, ब्राह्मणों को सुनाता है अथवा स्वयं ब्राह्मण के मुख से सुनता है, वह धन, आयु, तेज, यश, पुत्र, शत्रुओं पर विजय और संतोष प्राप्त करके अन्त में स्कन्द लोक को जाता है ॥20-21॥
The Brahmin who is concentrated and reads this story of the birth of Skandadev, narrates it to the Brahmins or hears it from the mouth of the Brahmin himself, he finally goes to the world of Skanda after getting wealth, age, bright fame, son, victory over the enemies and satisfaction. 20-21॥
इति श्रीमहाभारते वनपर्वणि मार्कण्डेयसमास्यापर्वणि आङ्गिरसे कार्तिकेयस्तवे द्वात्रिंशदधिकद्विशततमोऽध्याय:॥ २३२॥
इस प्रकार श्रीमहाभारत वनपर्वके अन्तर्गत मार्कण्डेयसमास्यापर्वमें आंगिरसोपाख्यानके प्रसंगमें
कार्तिकेयस्तुतिविषयक दो सौ बत्तीसवाँ अध्याय पूरा हुआ॥ २३२॥
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥