श्री महाभारत  »  पर्व 3: वन पर्व  »  अध्याय 232: कार्तिकेयके प्रसिद्ध नामोंका वर्णन तथा उनका स्तवन  »  श्लोक 12
 
 
श्लोक  3.232.12 
स्वाहा स्वधा त्वं परमं पवित्रं
मन्त्रस्तुतस्त्वं प्रथित: षडर्चि:।
संवत्सरस्त्वमृतवश्च षड् वै
मासार्धमासावयनं दिशश्च॥ १२॥
 
 
अनुवाद
आप स्वाहा, स्वधा, परम पवित्र, मन्त्रों से स्तुति की हुई तथा सुप्रसिद्ध षडार्ची (छः ज्वालाओं वाली) अग्नि हैं। आप ही वर्ष, छह ऋतुएँ, पक्ष, मास, संक्रांति और दिशाएँ हैं॥12॥
 
You are Swaha, Swadha, the most pure, praised by mantras and the well-known Shadarchi (six-flamed) fire. You are the year, the six seasons, the fortnight, the month, the solstices and the directions.॥12॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)