श्री महाभारत  »  पर्व 3: वन पर्व  »  अध्याय 232: कार्तिकेयके प्रसिद्ध नामोंका वर्णन तथा उनका स्तवन  »  श्लोक 1
 
 
श्लोक  3.232.1 
युधिष्ठिर उवाच
भगवन् श्रोतुमिच्छामि नामान्यस्य महात्मन:।
त्रिषु लोकेषु यान्यस्य विख्यातानि द्विजोत्तम॥ १॥
 
 
अनुवाद
युधिष्ठिर बोले - हे प्रभु! हे श्रेष्ठ ब्राह्मण! मैं तीनों लोकों में प्रसिद्ध महान कार्तिकेय के नाम सुनना चाहता हूँ।॥1॥
 
Yudhishthira said - O Lord! O great Brahmin! I wish to hear the names of the great Kartikeya that are famous in the three worlds. ॥ 1॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)