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mahabharat 3.231.99-100: परम बुद्धिमान महासेन ने अपने बाणों से अधिकांश दैत्यों को नष्ट कर दिया, शेष बचे हुए भयंकर दैत्य भी भयभीत होकर अपना साहस खो बैठे। स्कन्ददेव के भयंकर सलाहकार ने उन हजारों दैत्यों को मारकर खा लिया। 99-100॥   |   mahabharat अध्याय 3.231: स्कन्दद्वारा स्वाहादेवीका सत्कार, रुद्रदेवके साथ स्कन्द और देवताओंकी भद्रवट-यात्रा, देवासुर-संग्राम, महिषासुर-वध तथा स्कन्दकी प्रशंसा   ।   mahabharat पर्व 3: वन पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 3: वन पर्व  »  अध्याय 231: स्कन्दद्वारा स्वाहादेवीका सत्कार, रुद्रदेवके साथ स्कन्द और देवताओंकी भद्रवट-यात्रा, देवासुर-संग्राम, महिषासुर-वध तथा स्कन्दकी प्रशंसा  »  श्लोक 99-100
 
 
श्लोक  3.231.99-100 
प्राय: शरैर्विनिहता महासेनेन धीमता॥ ९९॥
शेषा दैत्यगणा घोरा भीतास्त्रस्ता दुरासदै:।
स्कन्दपारिषदैर्हत्वा भक्षिताश्च सहस्रश:॥ १००॥
 
 
अनुवाद
परम बुद्धिमान महासेन ने अपने बाणों से अधिकांश दैत्यों को नष्ट कर दिया, शेष बचे हुए भयंकर दैत्य भी भयभीत होकर अपना साहस खो बैठे। स्कन्ददेव के भयंकर सलाहकार ने उन हजारों दैत्यों को मारकर खा लिया। 99-100॥
 
The most intelligent Mahasen destroyed most of the demons with his arrows, the remaining fierce demons also got scared and lost their courage. Skandadev's fierce advisor killed and ate those thousands of demons. 99-100॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)