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श्री महाभारत  »  पर्व 3: वन पर्व  »  अध्याय 231: स्कन्दद्वारा स्वाहादेवीका सत्कार, रुद्रदेवके साथ स्कन्द और देवताओंकी भद्रवट-यात्रा, देवासुर-संग्राम, महिषासुर-वध तथा स्कन्दकी प्रशंसा  »  श्लोक 98-99h
 
 
श्लोक  3.231.98-99h 
उत्तरा: कुरवस्तेन गच्छन्त्यद्य यथासुखम्।
क्षिप्ताक्षिप्ता तु सा शक्तिर्हत्वा शत्रून् सहस्रश:॥ ९८॥
स्कन्दहस्तमनुप्राप्ता दृश्यते देवदानवै:।
 
 
अनुवाद
उत्तर कुरु के निवासी अब उस मार्ग पर सुखपूर्वक यात्रा करते हैं। देवताओं और दानवों ने देखा कि कुमार कार्तिकेय अपनी शक्ति से शत्रुओं पर बार-बार आक्रमण करते हैं और वह शक्ति हजारों योद्धाओं का वध करके उनके पास लौट आती है॥98 1/2॥
 
The residents of Uttara Kuru now travel comfortably on that road. The gods and demons saw that Kumar Kartikeya repeatedly attacks the enemies with his Shakti and it returns to him after killing thousands of warriors.॥98 1/2॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)