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mahabharat 3.231.92: देवताओं के लिए यह महान भय का क्षण था। उसी समय क्रोध में भरे हुए कुमार महासेन प्रज्वलित सूर्य के समान वहाँ आ पहुँचे।   |   mahabharat अध्याय 3.231: स्कन्दद्वारा स्वाहादेवीका सत्कार, रुद्रदेवके साथ स्कन्द और देवताओंकी भद्रवट-यात्रा, देवासुर-संग्राम, महिषासुर-वध तथा स्कन्दकी प्रशंसा   ।   mahabharat पर्व 3: वन पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 3: वन पर्व  »  अध्याय 231: स्कन्दद्वारा स्वाहादेवीका सत्कार, रुद्रदेवके साथ स्कन्द और देवताओंकी भद्रवट-यात्रा, देवासुर-संग्राम, महिषासुर-वध तथा स्कन्दकी प्रशंसा  »  श्लोक 92
 
 
श्लोक  3.231.92 
ततस्तस्मिन् भये घोरे देवानां समुपस्थिते।
आजगाम महासेन: क्रोधात् सूर्य इव ज्वलन्॥ ९२॥
 
 
अनुवाद
देवताओं के लिए यह महान भय का क्षण था। उसी समय क्रोध में भरे हुए कुमार महासेन प्रज्वलित सूर्य के समान वहाँ आ पहुँचे।
 
It was a moment of great fear for the gods. At that very moment, Kumar Mahasena, full of anger, arrived there like the blazing Sun.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)