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mahabharat 3.231.91: रुद्र के रथ को देखकर भयानक राक्षस महिषासुर बार-बार गर्जना करने लगा, जिससे देवता भयभीत हो गए और राक्षस प्रसन्न हो गए।   |   mahabharat अध्याय 3.231: स्कन्दद्वारा स्वाहादेवीका सत्कार, रुद्रदेवके साथ स्कन्द और देवताओंकी भद्रवट-यात्रा, देवासुर-संग्राम, महिषासुर-वध तथा स्कन्दकी प्रशंसा   ।   mahabharat पर्व 3: वन पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 3: वन पर्व  »  अध्याय 231: स्कन्दद्वारा स्वाहादेवीका सत्कार, रुद्रदेवके साथ स्कन्द और देवताओंकी भद्रवट-यात्रा, देवासुर-संग्राम, महिषासुर-वध तथा स्कन्दकी प्रशंसा  »  श्लोक 91
 
 
श्लोक  3.231.91 
महिषोऽपि रथं दृष्ट्वा रौद्रो रुद्रस्य चानदत्।
देवान् संत्रासयंश्चापि दैत्यांश्चापि प्रहर्षयन्॥ ९१॥
 
 
अनुवाद
रुद्र के रथ को देखकर भयानक राक्षस महिषासुर बार-बार गर्जना करने लगा, जिससे देवता भयभीत हो गए और राक्षस प्रसन्न हो गए।
 
On seeing Rudra's chariot, the terrible demon Mahishasura began to roar repeatedly, frightening the gods and delighting the demons.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)