श्री महाभारत  »  पर्व 3: वन पर्व  »  अध्याय 231: स्कन्दद्वारा स्वाहादेवीका सत्कार, रुद्रदेवके साथ स्कन्द और देवताओंकी भद्रवट-यात्रा, देवासुर-संग्राम, महिषासुर-वध तथा स्कन्दकी प्रशंसा  »  श्लोक 88
 
 
श्लोक  3.231.88 
यदा रुद्ररथं क्रुद्धो महिष: सहसा गत:।
रेसतू रोदसी गाढं मुमुहुश्च महर्षय:॥ ८८॥
 
 
अनुवाद
जब क्रोध में भरे हुए महिषासुर ने भगवान रुद्र के रथ पर अचानक आक्रमण किया, तब पृथ्वी और आकाश में महान् हलचल मच गई और बड़े-बड़े ऋषिगण भी भयभीत हो गए ॥88॥
 
When Mahishasura, filled with anger, suddenly attacked Lord Rudra's chariot, there was a great commotion in the earth and sky and even the great sages were frightened. ॥ 88॥
 ✨ ai-generated
 
 
  Connect Form
  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
  © 2026 vedamrit.in All Rights Reserved. Developed by acd