vedamrit
Reset
Home
ग्रन्थ
श्रीमद् वाल्मीकि रामायण
श्रीमद् भगवद गीता
______________
श्री विष्णु पुराण
श्रीमद् भागवतम
______________
श्रीचैतन्य भागवत
वैष्णव भजन
About
Contact
श्री महाभारत
»
पर्व 3: वन पर्व
»
अध्याय 231: स्कन्दद्वारा स्वाहादेवीका सत्कार, रुद्रदेवके साथ स्कन्द और देवताओंकी भद्रवट-यात्रा, देवासुर-संग्राम, महिषासुर-वध तथा स्कन्दकी प्रशंसा
»
श्लोक 87
श्लोक
3.231.87
तत: स महिष: क्रुद्धस्तूर्णं रुद्ररथं ययौ।
अभिद्रुत्य च जग्राह रुद्रस्य रथकूबरम्॥ ८७॥
अनुवाद
तब क्रोध में भरा हुआ महिषासुर तुरंत ही भगवान रुद्र के रथ की ओर दौड़ा और पास जाकर उनके रथ का कूबड़ पकड़ लिया ॥87॥
Then Mahishasura filled with anger immediately ran towards the chariot of Lord Rudra and went near and grabbed the hump of his chariot. ॥ 87॥
✨ ai-generated
Connect Form
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
© 2026 vedamrit.in All Rights Reserved. Developed by acd