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mahabharat 3.231.87: तब क्रोध में भरा हुआ महिषासुर तुरंत ही भगवान रुद्र के रथ की ओर दौड़ा और पास जाकर उनके रथ का कूबड़ पकड़ लिया ॥87॥   |   mahabharat अध्याय 3.231: स्कन्दद्वारा स्वाहादेवीका सत्कार, रुद्रदेवके साथ स्कन्द और देवताओंकी भद्रवट-यात्रा, देवासुर-संग्राम, महिषासुर-वध तथा स्कन्दकी प्रशंसा   ।   mahabharat पर्व 3: वन पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 3: वन पर्व  »  अध्याय 231: स्कन्दद्वारा स्वाहादेवीका सत्कार, रुद्रदेवके साथ स्कन्द और देवताओंकी भद्रवट-यात्रा, देवासुर-संग्राम, महिषासुर-वध तथा स्कन्दकी प्रशंसा  »  श्लोक 87
 
 
श्लोक  3.231.87 
तत: स महिष: क्रुद्धस्तूर्णं रुद्ररथं ययौ।
अभिद्रुत्य च जग्राह रुद्रस्य रथकूबरम्॥ ८७॥
 
 
अनुवाद
तब क्रोध में भरा हुआ महिषासुर तुरंत ही भगवान रुद्र के रथ की ओर दौड़ा और पास जाकर उनके रथ का कूबड़ पकड़ लिया ॥87॥
 
Then Mahishasura filled with anger immediately ran towards the chariot of Lord Rudra and went near and grabbed the hump of his chariot. ॥ 87॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)