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mahabharat 3.231.83-84: लेकिन महिषासुर ने देवताओं का पीछा किया और उन पर पर्वत गिरा दिया। हे युधिष्ठिर! उस भयानक पर्वत के गिरने से देवताओं की सेना के दस हज़ार योद्धा दबकर मर गए।   |   mahabharat अध्याय 3.231: स्कन्दद्वारा स्वाहादेवीका सत्कार, रुद्रदेवके साथ स्कन्द और देवताओंकी भद्रवट-यात्रा, देवासुर-संग्राम, महिषासुर-वध तथा स्कन्दकी प्रशंसा   ।   mahabharat पर्व 3: वन पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 3: वन पर्व  »  अध्याय 231: स्कन्दद्वारा स्वाहादेवीका सत्कार, रुद्रदेवके साथ स्कन्द और देवताओंकी भद्रवट-यात्रा, देवासुर-संग्राम, महिषासुर-वध तथा स्कन्दकी प्रशंसा  »  श्लोक 83-84
 
 
श्लोक  3.231.83-84 
अथाभिद्रुत्य महिषो देवांश्चिक्षेप तं गिरिम्॥ ८३॥
पतता तेन गिरिणा देवसैन्यस्य पार्थिव।
भीमरूपेण निहतमयुतं प्रापतद् भुवि॥ ८४॥
 
 
अनुवाद
लेकिन महिषासुर ने देवताओं का पीछा किया और उन पर पर्वत गिरा दिया। हे युधिष्ठिर! उस भयानक पर्वत के गिरने से देवताओं की सेना के दस हज़ार योद्धा दबकर मर गए।
 
But Mahishasura pursued the gods and threw the mountain down upon them. O Yudhishthira! Ten thousand warriors of the army of gods were crushed to death by the fall of that terrible mountain.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)