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mahabharat 3.231.80-81h: उस समय राक्षस राजाओं की भयंकर गर्जना सुनाई दे रही थी। उनके युद्ध-वाद्यों और तुरहियों की गम्भीर ध्वनि सर्वत्र गूँज रही थी।   |   mahabharat अध्याय 3.231: स्कन्दद्वारा स्वाहादेवीका सत्कार, रुद्रदेवके साथ स्कन्द और देवताओंकी भद्रवट-यात्रा, देवासुर-संग्राम, महिषासुर-वध तथा स्कन्दकी प्रशंसा   ।   mahabharat पर्व 3: वन पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 3: वन पर्व  »  अध्याय 231: स्कन्दद्वारा स्वाहादेवीका सत्कार, रुद्रदेवके साथ स्कन्द और देवताओंकी भद्रवट-यात्रा, देवासुर-संग्राम, महिषासुर-वध तथा स्कन्दकी प्रशंसा  »  श्लोक 80-81h
 
 
श्लोक  3.231.80-81h 
ततस्तूर्यप्रणादाश्च भेरीणां च महास्वन:॥ ८०॥
बभूवुर्दानवेन्द्राणां सिंहनादाश्च दारुणा:।
 
 
अनुवाद
उस समय राक्षस राजाओं की भयंकर गर्जना सुनाई दे रही थी। उनके युद्ध-वाद्यों और तुरहियों की गम्भीर ध्वनि सर्वत्र गूँज रही थी।
 
At that time the terrifying roars of the demon kings could be heard. The deep sound of their war instruments and trumpets reverberated everywhere. 80 1/2.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)