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mahabharat 3.231.75-76h: हे राजन! देवताओं के बाणों से बिंधे हुए उन दैत्यों के शरीर सब प्रकार से फट गए और बादलों के समान पृथ्वी पर गिरने लगे।   |   mahabharat अध्याय 3.231: स्कन्दद्वारा स्वाहादेवीका सत्कार, रुद्रदेवके साथ स्कन्द और देवताओंकी भद्रवट-यात्रा, देवासुर-संग्राम, महिषासुर-वध तथा स्कन्दकी प्रशंसा   ।   mahabharat पर्व 3: वन पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 3: वन पर्व  »  अध्याय 231: स्कन्दद्वारा स्वाहादेवीका सत्कार, रुद्रदेवके साथ स्कन्द और देवताओंकी भद्रवट-यात्रा, देवासुर-संग्राम, महिषासुर-वध तथा स्कन्दकी प्रशंसा  »  श्लोक 75-76h
 
 
श्लोक  3.231.75-76h 
तानि दैत्यशरीराणि निर्भिन्नानि स्म सायकै:॥ ७५॥
अपतन् भूतले राजंश्छिन्नाभ्राणीव सर्वश:।
 
 
अनुवाद
हे राजन! देवताओं के बाणों से बिंधे हुए उन दैत्यों के शरीर सब प्रकार से फट गए और बादलों के समान पृथ्वी पर गिरने लगे।
 
O King! The bodies of those demons, pierced by the arrows of the gods, were torn in every way and began falling on the earth like clouds.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)