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mahabharat 3.231.72-73h: इन्द्र को शरण में लेकर उन्होंने पुनः दैत्यों के साथ युद्ध आरम्भ कर दिया। तत्पश्चात् वे सभी देवता महाबली मरुद्गणों तथा वसुओं एवं महाभाग साध्यगणों के साथ युद्धभूमि में आगे बढ़ने लगे। 72 1/2॥   |   mahabharat अध्याय 3.231: स्कन्दद्वारा स्वाहादेवीका सत्कार, रुद्रदेवके साथ स्कन्द और देवताओंकी भद्रवट-यात्रा, देवासुर-संग्राम, महिषासुर-वध तथा स्कन्दकी प्रशंसा   ।   mahabharat पर्व 3: वन पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 3: वन पर्व  »  अध्याय 231: स्कन्दद्वारा स्वाहादेवीका सत्कार, रुद्रदेवके साथ स्कन्द और देवताओंकी भद्रवट-यात्रा, देवासुर-संग्राम, महिषासुर-वध तथा स्कन्दकी प्रशंसा  »  श्लोक 72-73h
 
 
श्लोक  3.231.72-73h 
दानवान् प्रत्ययुध्यन्त शक्रं कृत्वा व्यपाश्रयम्।
ततस्ते त्रिदशा: सर्वे मरुतश्च महाबला:॥ ७२॥
प्रत्युद्ययुर्महाभागा: साध्याश्च वसुभि: सह।
 
 
अनुवाद
इन्द्र को शरण में लेकर उन्होंने पुनः दैत्यों के साथ युद्ध आरम्भ कर दिया। तत्पश्चात् वे सभी देवता महाबली मरुद्गणों तथा वसुओं एवं महाभाग साध्यगणों के साथ युद्धभूमि में आगे बढ़ने लगे। 72 1/2॥
 
Taking Indra as his refuge, he again started the war with the demons. After that, all those gods started moving forward in the battlefield along with Mahabali Marudgana and Vasus and Mahabhaga Sadhyagana. 72 1/2॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)