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mahabharat 3.231.66-67h: जैसे आग पूरे जंगल को जला देती है, वैसे ही दैत्यों ने देवताओं की सेना का भारी विनाश किया। जब बड़े-बड़े वृक्षों से भरे जंगल का एक बड़ा हिस्सा जल जाता है, तो उसकी हालत जंगल जैसी हो जाती है। इसी तरह, देवताओं की सेना भी नष्ट हो रही थी क्योंकि उसके अधिकांश सैनिक दैत्यों के अस्त्र-शस्त्रों से जलकर राख हो गए थे।   |   mahabharat अध्याय 3.231: स्कन्दद्वारा स्वाहादेवीका सत्कार, रुद्रदेवके साथ स्कन्द और देवताओंकी भद्रवट-यात्रा, देवासुर-संग्राम, महिषासुर-वध तथा स्कन्दकी प्रशंसा   ।   mahabharat पर्व 3: वन पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 3: वन पर्व  »  अध्याय 231: स्कन्दद्वारा स्वाहादेवीका सत्कार, रुद्रदेवके साथ स्कन्द और देवताओंकी भद्रवट-यात्रा, देवासुर-संग्राम, महिषासुर-वध तथा स्कन्दकी प्रशंसा  »  श्लोक 66-67h
 
 
श्लोक  3.231.66-67h 
असुरैर्वध्यमानं तत् पावकैरिव काननम्॥ ६६॥
अपतद् दग्धभूयिष्ठं महाद्रुमवनं यथा।
 
 
अनुवाद
जैसे आग पूरे जंगल को जला देती है, वैसे ही दैत्यों ने देवताओं की सेना का भारी विनाश किया। जब बड़े-बड़े वृक्षों से भरे जंगल का एक बड़ा हिस्सा जल जाता है, तो उसकी हालत जंगल जैसी हो जाती है। इसी तरह, देवताओं की सेना भी नष्ट हो रही थी क्योंकि उसके अधिकांश सैनिक दैत्यों के अस्त्र-शस्त्रों से जलकर राख हो गए थे।
 
Just as fire burns down an entire forest, similarly the demons caused great destruction to the army of the gods. When a large part of a forest full of big trees is burnt down, its condition is like that of a forest. Similarly, the army of the gods was being destroyed as most of its soldiers were burnt down by the weapons of the demons.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)