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mahabharat 3.231.57: रुद्र बोले - बेटा ! जब भी तुम्हें मेरी आवश्यकता हो, तुम मुझसे अवश्य मिलो । मेरे दर्शन और पूजन से तुम्हें परम कल्याण की प्राप्ति होगी ॥ 57॥   |   mahabharat अध्याय 3.231: स्कन्दद्वारा स्वाहादेवीका सत्कार, रुद्रदेवके साथ स्कन्द और देवताओंकी भद्रवट-यात्रा, देवासुर-संग्राम, महिषासुर-वध तथा स्कन्दकी प्रशंसा   ।   mahabharat पर्व 3: वन पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 3: वन पर्व  »  अध्याय 231: स्कन्दद्वारा स्वाहादेवीका सत्कार, रुद्रदेवके साथ स्कन्द और देवताओंकी भद्रवट-यात्रा, देवासुर-संग्राम, महिषासुर-वध तथा स्कन्दकी प्रशंसा  »  श्लोक 57
 
 
श्लोक  3.231.57 
रुद्र उवाच
कार्येष्वहं त्वया पुत्र संद्रष्टव्य: सदैव हि।
दर्शनान्मम भक्त्या च श्रेय: परमवाप्स्यसि॥ ५७॥
 
 
अनुवाद
रुद्र बोले - बेटा ! जब भी तुम्हें मेरी आवश्यकता हो, तुम मुझसे अवश्य मिलो । मेरे दर्शन और पूजन से तुम्हें परम कल्याण की प्राप्ति होगी ॥ 57॥
 
Rudra said - Son! Whenever you need me, you should always meet me. By seeing me and worshipping me, you will attain supreme welfare. ॥ 57॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)