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mahabharat 3.231.56: स्कन्द बोले - प्रभु! मैं सातवें व्यूह मरुत्स्कन्ध की अवश्य रक्षा करूँगा। देवा! इसके अतिरिक्त मेरा जो भी अन्य कर्तव्य हो, उसके लिए मुझे आज्ञा दीजिए।   |   mahabharat अध्याय 3.231: स्कन्दद्वारा स्वाहादेवीका सत्कार, रुद्रदेवके साथ स्कन्द और देवताओंकी भद्रवट-यात्रा, देवासुर-संग्राम, महिषासुर-वध तथा स्कन्दकी प्रशंसा   ।   mahabharat पर्व 3: वन पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 3: वन पर्व  »  अध्याय 231: स्कन्दद्वारा स्वाहादेवीका सत्कार, रुद्रदेवके साथ स्कन्द और देवताओंकी भद्रवट-यात्रा, देवासुर-संग्राम, महिषासुर-वध तथा स्कन्दकी प्रशंसा  »  श्लोक 56
 
 
श्लोक  3.231.56 
स्कन्द उवाच
सप्तमं मारुतस्कन्धं पालयिष्याम्यहं प्रभो।
यदन्यदपि मे कार्यं देव तद् वद माचिरम्॥ ५६॥
 
 
अनुवाद
स्कन्द बोले - प्रभु! मैं सातवें व्यूह मरुत्स्कन्ध की अवश्य रक्षा करूँगा। देवा! इसके अतिरिक्त मेरा जो भी अन्य कर्तव्य हो, उसके लिए मुझे आज्ञा दीजिए।
 
Skanda said - Lord! I will definitely protect the seventh Vyuha Marutskandha. Deva! Apart from this, please give me orders for whatever other duty I have.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)