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mahabharat 3.231.54: इसी प्रकार ब्राह्मणों के हितैषी, देवताओं के सेनापति और कृत्तिकनन्दन के पुत्र स्कन्द भी देवताओं की सेना से घिरे हुए समस्त देवताओं के स्वामी भगवान शिव के पीछे-पीछे चल रहे थे॥54॥   |   mahabharat अध्याय 3.231: स्कन्दद्वारा स्वाहादेवीका सत्कार, रुद्रदेवके साथ स्कन्द और देवताओंकी भद्रवट-यात्रा, देवासुर-संग्राम, महिषासुर-वध तथा स्कन्दकी प्रशंसा   ।   mahabharat पर्व 3: वन पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 3: वन पर्व  »  अध्याय 231: स्कन्दद्वारा स्वाहादेवीका सत्कार, रुद्रदेवके साथ स्कन्द और देवताओंकी भद्रवट-यात्रा, देवासुर-संग्राम, महिषासुर-वध तथा स्कन्दकी प्रशंसा  »  श्लोक 54
 
 
श्लोक  3.231.54 
देवसेनापतिस्त्वेवं देवसेनाभिरावृत:।
अनुगच्छति देवेशं ब्रह्मण्य: कृत्तिकासुत:॥ ५४॥
 
 
अनुवाद
इसी प्रकार ब्राह्मणों के हितैषी, देवताओं के सेनापति और कृत्तिकनन्दन के पुत्र स्कन्द भी देवताओं की सेना से घिरे हुए समस्त देवताओं के स्वामी भगवान शिव के पीछे-पीछे चल रहे थे॥54॥
 
Similarly, Skanda, the well-wisher of Brahmins, the commander of the gods and the son of Krittikanandana, was also following Lord Shiva, the lord of all gods, surrounded by the army of gods. ॥ 54॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)