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mahabharat 3.231.51: भगवान रुद्र के मित्र यक्षराज पिंगलदेव, जो सदैव श्मशान में निवास करते थे (उनकी रक्षा के लिए) और सम्पूर्ण जगत को आनन्द देने वाले थे, उस यात्रा में भगवान शिव के साथ थे ॥ 51॥   |   mahabharat अध्याय 3.231: स्कन्दद्वारा स्वाहादेवीका सत्कार, रुद्रदेवके साथ स्कन्द और देवताओंकी भद्रवट-यात्रा, देवासुर-संग्राम, महिषासुर-वध तथा स्कन्दकी प्रशंसा   ।   mahabharat पर्व 3: वन पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 3: वन पर्व  »  अध्याय 231: स्कन्दद्वारा स्वाहादेवीका सत्कार, रुद्रदेवके साथ स्कन्द और देवताओंकी भद्रवट-यात्रा, देवासुर-संग्राम, महिषासुर-वध तथा स्कन्दकी प्रशंसा  »  श्लोक 51
 
 
श्लोक  3.231.51 
व्यापृतस्तु श्मशाने यो नित्यं रुद्रस्य वै सखा।
पिङ्गलो नाम यक्षेन्द्रो लोकस्यानन्ददायक:॥ ५१॥
 
 
अनुवाद
भगवान रुद्र के मित्र यक्षराज पिंगलदेव, जो सदैव श्मशान में निवास करते थे (उनकी रक्षा के लिए) और सम्पूर्ण जगत को आनन्द देने वाले थे, उस यात्रा में भगवान शिव के साथ थे ॥ 51॥
 
Lord Rudra's friend, Yaksharaj Pingaldev, who always resided in the cremation ground (to protect him) and who gave joy to the entire world, was with Lord Shiva on that journey. ॥ 51॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)