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mahabharat 3.231.50: इन्द्र आदि देवता सेना के शीर्ष पर उपस्थित होकर भगवान शिव की आज्ञा का पालन करते थे। एक दैत्य ग्रह सेना का ध्वज लेकर आगे-आगे चलता था।   |   mahabharat अध्याय 3.231: स्कन्दद्वारा स्वाहादेवीका सत्कार, रुद्रदेवके साथ स्कन्द और देवताओंकी भद्रवट-यात्रा, देवासुर-संग्राम, महिषासुर-वध तथा स्कन्दकी प्रशंसा   ।   mahabharat पर्व 3: वन पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 3: वन पर्व  »  अध्याय 231: स्कन्दद्वारा स्वाहादेवीका सत्कार, रुद्रदेवके साथ स्कन्द और देवताओंकी भद्रवट-यात्रा, देवासुर-संग्राम, महिषासुर-वध तथा स्कन्दकी प्रशंसा  »  श्लोक 50
 
 
श्लोक  3.231.50 
तस्य कुर्वन्ति वचनं सेन्द्रा देवाश्चमूमुखे।
गृहीत्वा तु पताकां वै यात्यग्रे राक्षसो ग्रह:॥ ५०॥
 
 
अनुवाद
इन्द्र आदि देवता सेना के शीर्ष पर उपस्थित होकर भगवान शिव की आज्ञा का पालन करते थे। एक दैत्य ग्रह सेना का ध्वज लेकर आगे-आगे चलता था।
 
Gods like Indra etc. used to be present at the head of the army and obey the orders of Lord Shiva. A demon planet used to walk ahead carrying the flag of the army. 50.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)