श्री महाभारत  »  पर्व 3: वन पर्व  »  अध्याय 231: स्कन्दद्वारा स्वाहादेवीका सत्कार, रुद्रदेवके साथ स्कन्द और देवताओंकी भद्रवट-यात्रा, देवासुर-संग्राम, महिषासुर-वध तथा स्कन्दकी प्रशंसा  »  श्लोक 45
 
 
श्लोक  3.231.45 
स्त्रियश्च विविधाकारा यान्ति रुद्रस्य पृष्ठत:।
सृजन्त्य: पुष्पवर्षाणि चारुरूपा वराङ्गना:॥ ४५॥
 
 
अनुवाद
मनमोहक रूप और नाना रूपोंवाली अनेक सुन्दर स्त्रियाँ भगवान रुद्र के पीछे-पीछे पुष्पवर्षा करती हुई चल रही थीं ॥ 45॥
 
Many beautiful women with charming appearance and various forms were following Lord Rudra, showering flowers on him. ॥ 45॥
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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