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mahabharat 3.231.39-40h: विजय के पीछे भगवान रुद्र का पट्टिश नामक अस्त्र चल रहा था, जो गदा, मूसल और भाला आदि उत्तम आयुधों से घिरा हुआ था ॥39 1/2॥   |   mahabharat अध्याय 3.231: स्कन्दद्वारा स्वाहादेवीका सत्कार, रुद्रदेवके साथ स्कन्द और देवताओंकी भद्रवट-यात्रा, देवासुर-संग्राम, महिषासुर-वध तथा स्कन्दकी प्रशंसा   ।   mahabharat पर्व 3: वन पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 3: वन पर्व  »  अध्याय 231: स्कन्दद्वारा स्वाहादेवीका सत्कार, रुद्रदेवके साथ स्कन्द और देवताओंकी भद्रवट-यात्रा, देवासुर-संग्राम, महिषासुर-वध तथा स्कन्दकी प्रशंसा  »  श्लोक 39-40h
 
 
श्लोक  3.231.39-40h 
पृष्ठतो विजयस्यापि याति रुद्रस्य पट्टिश:॥ ३९॥
गदामुसलशक्त्याद्यैर्वृत: प्रहरणोत्तमै:।
 
 
अनुवाद
विजय के पीछे भगवान रुद्र का पट्टिश नामक अस्त्र चल रहा था, जो गदा, मूसल और भाला आदि उत्तम आयुधों से घिरा हुआ था ॥39 1/2॥
 
Behind Vijay was going the weapon of Lord Rudra called Pattisha, which was surrounded by excellent weapons like mace, pestle and spear etc. ॥ 39 1/2॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)