Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7
mahabharat 3.231.33-34h: अन्य देवताओं के साथ इन्द्र भी ऐरावत हाथी पर सवार होकर वरदाता भगवान वृषभध्वज (जिनका नाम वृषभध्वज है) के पीछे-पीछे भद्रवत को जा रहे थे।   |   mahabharat अध्याय 3.231: स्कन्दद्वारा स्वाहादेवीका सत्कार, रुद्रदेवके साथ स्कन्द और देवताओंकी भद्रवट-यात्रा, देवासुर-संग्राम, महिषासुर-वध तथा स्कन्दकी प्रशंसा   ।   mahabharat पर्व 3: वन पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 3: वन पर्व  »  अध्याय 231: स्कन्दद्वारा स्वाहादेवीका सत्कार, रुद्रदेवके साथ स्कन्द और देवताओंकी भद्रवट-यात्रा, देवासुर-संग्राम, महिषासुर-वध तथा स्कन्दकी प्रशंसा  »  श्लोक 33-34h
 
 
श्लोक  3.231.33-34h 
ऐरावतं समास्थाय शक्रश्चापि सुरै: सह॥ ३३॥
पृष्ठतोऽनुययौ यान्तं वरदं वृषभध्वजम्।
 
 
अनुवाद
अन्य देवताओं के साथ इन्द्र भी ऐरावत हाथी पर सवार होकर वरदाता भगवान वृषभध्वज (जिनका नाम वृषभध्वज है) के पीछे-पीछे भद्रवत को जा रहे थे।
 
Indra along with the other gods were also riding on the Airavat elephant and following the boon-giving Lord Vrishabhvaja (whose name is Vrishabhadhwaj) while going to Bhadravat. 33 1/2.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)