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mahabharat 3.231.31-32h: भगवती उमा के साथ उस रथ पर विराजमान भगवान शिव ऐसे शोभायमान हो रहे थे मानो इन्द्रधनुषी बादलों के बीच सूर्यदेव बिजली की चमक से चमक रहे हों।   |   mahabharat अध्याय 3.231: स्कन्दद्वारा स्वाहादेवीका सत्कार, रुद्रदेवके साथ स्कन्द और देवताओंकी भद्रवट-यात्रा, देवासुर-संग्राम, महिषासुर-वध तथा स्कन्दकी प्रशंसा   ।   mahabharat पर्व 3: वन पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 3: वन पर्व  »  अध्याय 231: स्कन्दद्वारा स्वाहादेवीका सत्कार, रुद्रदेवके साथ स्कन्द और देवताओंकी भद्रवट-यात्रा, देवासुर-संग्राम, महिषासुर-वध तथा स्कन्दकी प्रशंसा  »  श्लोक 31-32h
 
 
श्लोक  3.231.31-32h 
तस्मिन् रथे पशुपति: स्थितो भात्युमया सह॥ ३१॥
विद्युता सहित: सूर्य: सेन्द्रचापे घने यथा।
 
 
अनुवाद
भगवती उमा के साथ उस रथ पर विराजमान भगवान शिव ऐसे शोभायमान हो रहे थे मानो इन्द्रधनुषी बादलों के बीच सूर्यदेव बिजली की चमक से चमक रहे हों।
 
Seated on that chariot with Bhagwati Uma, Lord Shiva looked as graceful as if the Sun God was shining with lightning amidst the clouds having rainbow. 31 1/2
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)