श्री महाभारत  »  पर्व 3: वन पर्व  »  अध्याय 231: स्कन्दद्वारा स्वाहादेवीका सत्कार, रुद्रदेवके साथ स्कन्द और देवताओंकी भद्रवट-यात्रा, देवासुर-संग्राम, महिषासुर-वध तथा स्कन्दकी प्रशंसा  »  श्लोक 2
 
 
श्लोक  3.231.2 
इच्छाम्यहं त्वया दत्तां प्रीतिं परमदुर्लभाम्।
तामब्रवीत् तत: स्कन्द: प्रीतिमिच्छसि कीदृशीम्॥ २॥
 
 
अनुवाद
‘अतः मैं चाहता हूँ कि आप मुझे अत्यंत दुर्लभ प्रेम प्रदान करें।’ तब स्कन्द ने पूछा – ‘माता, आप किस प्रकार का प्रेम प्राप्त करना चाहती हैं?’॥2॥
 
‘Therefore I want you to grant me the most rare love.’ Then Skanda asked – ‘Mother, what kind of love do you wish to receive?’॥ 2॥
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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