मार्कण्डेय उवाच
अर्कपुष्पैस्तु ते पञ्च गणा: पूज्या धनार्थिभि:।
व्याधिप्रशमनार्थं च तेषां पूजां समाचरेत्॥ १४॥
अनुवाद
मार्कण्डेय कहते हैं - हे राजन! धन चाहने वालों को इन पाँचों गणों की आक के फूलों से सेवा करनी चाहिए। रोगों से मुक्ति के लिए भी इनका पूजन करना उचित है।॥14॥
Markandeya says - O King! Those who seek wealth should serve these five Ganas with Aak flowers. It is also appropriate to worship them for the relief from diseases. ॥ 14॥