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mahabharat 3.231.13: तब अपार आत्मविश्वास से युक्त और पिताभक्त कुमार महासेन ने ‘एवमस्तु’ कहकर अपने पिता भगवान महेश्वर की पूजा की॥13॥   |   mahabharat अध्याय 3.231: स्कन्दद्वारा स्वाहादेवीका सत्कार, रुद्रदेवके साथ स्कन्द और देवताओंकी भद्रवट-यात्रा, देवासुर-संग्राम, महिषासुर-वध तथा स्कन्दकी प्रशंसा   ।   mahabharat पर्व 3: वन पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 3: वन पर्व  »  अध्याय 231: स्कन्दद्वारा स्वाहादेवीका सत्कार, रुद्रदेवके साथ स्कन्द और देवताओंकी भद्रवट-यात्रा, देवासुर-संग्राम, महिषासुर-वध तथा स्कन्दकी प्रशंसा  »  श्लोक 13
 
 
श्लोक  3.231.13 
एवमस्त्विति चाप्युक्त्वा महासेनो महेश्वरम्।
अपूजयदमेयात्मा पितरं पितृवत्सल:॥ १३॥
 
 
अनुवाद
तब अपार आत्मविश्वास से युक्त और पिताभक्त कुमार महासेन ने ‘एवमस्तु’ कहकर अपने पिता भगवान महेश्वर की पूजा की॥13॥
 
Then Kumar Mahasen, full of immense self-confidence and a devotee of his father, worshiped his father Lord Maheshwar by saying 'Evamastu'. 13॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)