श्री महाभारत  »  पर्व 3: वन पर्व  »  अध्याय 231: स्कन्दद्वारा स्वाहादेवीका सत्कार, रुद्रदेवके साथ स्कन्द और देवताओंकी भद्रवट-यात्रा, देवासुर-संग्राम, महिषासुर-वध तथा स्कन्दकी प्रशंसा  »  श्लोक 111
 
 
श्लोक  3.231.111 
गतो भद्रवटं रुद्रो निवृत्ताश्च दिवौकस:।
उक्ताश्च देवा रुद्रेण स्कन्दं पश्यत मामिव॥ १११॥
 
 
अनुवाद
भगवान रुद्र भद्रवत के निकट चले गए और देवतागण अपने-अपने स्थान को लौटने लगे। उस समय भगवान शंकर ने देवताओं से कहा- 'तुम सब लोग कुमार कार्तिकेय को मेरा ही रूप मानो।'॥111॥
 
Lord Rudra went near Bhadravat and the gods started returning to their respective places. At that time Lord Shankar said to the gods - 'All of you should consider Kumar Kartikeya as me'. 111.
 ✨ ai-generated
 
 
  Connect Form
  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
  © 2026 vedamrit.in All Rights Reserved. Developed by acd