श्री महाभारत  »  पर्व 3: वन पर्व  »  अध्याय 231: स्कन्दद्वारा स्वाहादेवीका सत्कार, रुद्रदेवके साथ स्कन्द और देवताओंकी भद्रवट-यात्रा, देवासुर-संग्राम, महिषासुर-वध तथा स्कन्दकी प्रशंसा  »  श्लोक 108-109
 
 
श्लोक  3.231.108-109 
अजेयस्त्वं रणेऽरीणामुमापतिरिव प्रभु:।
एतत् ते प्रथमं देव ख्यातं कर्म भविष्यति॥ १०८॥
त्रिषु लोकेषु कीर्तिश्च तवाक्षय्या भविष्यति।
वशगाश्च भविष्यन्ति सुरास्तव महाभुज॥ १०९॥
 
 
अनुवाद
हे भगवन! आप भगवान शंकर के समान युद्ध में शत्रुओं के लिए अजेय हैं। आपका यह प्रथम पराक्रम सर्वत्र प्रसिद्ध होगा। आपकी अनन्त कीर्ति तीनों लोकों में फैलेगी। हे महाबाहु! समस्त देवता आपके अधीन होंगे।
 
God! Like Lord Shankar, you are invincible to enemies in battle. This first feat of yours will be famous everywhere. Your eternal fame will spread in all three worlds. Great arms! All the gods will be under your control.
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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