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mahabharat 3.231.103: उस समय देवतागण कृत्तिकानंदन स्कंददेव की स्तुति और पूजा करने लगे। अपने पिता महेश्वर को प्रणाम करके कुमार स्कंद सर्वत्र किरणें फैलाने वाले अंशुमाली सूर्य के समान शोभायमान हो गए। 103॥   |   mahabharat अध्याय 3.231: स्कन्दद्वारा स्वाहादेवीका सत्कार, रुद्रदेवके साथ स्कन्द और देवताओंकी भद्रवट-यात्रा, देवासुर-संग्राम, महिषासुर-वध तथा स्कन्दकी प्रशंसा   ।   mahabharat पर्व 3: वन पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 3: वन पर्व  »  अध्याय 231: स्कन्दद्वारा स्वाहादेवीका सत्कार, रुद्रदेवके साथ स्कन्द और देवताओंकी भद्रवट-यात्रा, देवासुर-संग्राम, महिषासुर-वध तथा स्कन्दकी प्रशंसा  »  श्लोक 103
 
 
श्लोक  3.231.103 
सम्पूज्यमानस्त्रिदशैरभिवाद्य महेश्वरम्।
शुशुभे कृत्तिकापुत्र: प्रकीर्णांशुरिवांशुमान्॥ १०३॥
 
 
अनुवाद
उस समय देवतागण कृत्तिकानंदन स्कंददेव की स्तुति और पूजा करने लगे। अपने पिता महेश्वर को प्रणाम करके कुमार स्कंद सर्वत्र किरणें फैलाने वाले अंशुमाली सूर्य के समान शोभायमान हो गए। 103॥
 
At that time the gods started praising and worshiping Krittikanandan Skandadev. After paying obeisance to his father Maheshwar, Kumar Skanda became beautiful like Anshumali Sun, who spreads rays everywhere. 103॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)