श्री महाभारत  »  पर्व 3: वन पर्व  »  अध्याय 230: कृत्तिकाओंको नक्षत्रमण्डलमें स्थानकी प्राप्ति तथा मनुष्योंको कष्ट देनेवाले विविध ग्रहोंका वर्णन  »  श्लोक 8
 
 
श्लोक  3.230.8 
अभिजित् स्पर्धमाना तु रोहिण्या अनुजा स्वसा।
इच्छन्ती ज्येष्ठतां देवी तपस्तप्तुं वनं गता॥ ८॥
 
 
अनुवाद
रोहिणी की छोटी बहन अभिजित् देवी प्रतिस्पर्धा के कारण ज्येष्ठता प्राप्त करने की इच्छा से तपस्या करने के लिए वन में चली गई है ॥8॥
 
Rohini's younger sister Abhijit Devi has gone to the forest to do penance with the desire to gain seniority due to competition. 8॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)