इत्येष ते ग्रहोद्देशो मानुषाणां प्रकीर्तित:।
न स्पृशन्ति ग्रहा भक्तान्नरान् देवं महेश्वरम्॥ ५९॥
अनुवाद
राजन! इस प्रकार मैंने ग्रहों के कारण मनुष्यों को होने वाली बाधाओं का संक्षेप में वर्णन किया है। ये ग्रह भगवान महेश्वर के भक्तों को स्पर्श भी नहीं करते।
King! In this way I have briefly described the obstacles that humans face due to the planets. These planets do not even touch those who are devotees of Lord Maheshwar. 59.
इति श्रीमहाभारते वनपर्वणि मार्कण्डेयसमास्यापर्वणि आङ्गिरसे मनुष्यग्रहकथने त्रिंशदधिकद्विशततमोऽध्याय:॥ २३०॥
इस प्रकार श्रीमहाभारत वनपर्वके अन्तर्गत मार्कण्डेयसमास्यापर्वमें आंगिरसोपाख्यानके प्रसंगमें मनुष्योंको कष्ट देनेवाले ग्रहोंके वर्णनसे सम्बन्ध रखनेवाला दो सौ तीसवाँ अध्याय पूरा हुआ॥ २३०॥
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥