श्री महाभारत  »  पर्व 3: वन पर्व  »  अध्याय 230: कृत्तिकाओंको नक्षत्रमण्डलमें स्थानकी प्राप्ति तथा मनुष्योंको कष्ट देनेवाले विविध ग्रहोंका वर्णन  »  श्लोक 45
 
 
श्लोक  3.230.45 
एवमभ्यर्चिता: सर्वे प्रयच्छन्ति शुभं नृणाम्।
आयुर्वीर्यं च राजेन्द्र सम्यक्पूजानमस्कृता:॥ ४५॥
 
 
अनुवाद
राजेन्द्र! इस प्रकार से पूजन और विधिपूर्वक सम्मान करने पर सभी ग्रह मनुष्यों को सौभाग्य प्रदान करते हैं, उन्हें दीर्घायु और बल प्रदान करते हैं ॥ 45॥
 
Rajendra! When worshipped in this manner and honored in the prescribed manner, all the planets bring good fortune to human beings and grant them long life and strength. ॥ 45॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)