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mahabharat 3.230.43-44h: उपर्युक्त मातृ और पुरुष ग्रहों को सभी देहधारियों को सदैव 'स्कन्दग्रह' के नाम से जानना चाहिए ॥43 1/2॥   |   mahabharat अध्याय 3.230: कृत्तिकाओंको नक्षत्रमण्डलमें स्थानकी प्राप्ति तथा मनुष्योंको कष्ट देनेवाले विविध ग्रहोंका वर्णन   ।   mahabharat पर्व 3: वन पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 3: वन पर्व  »  अध्याय 230: कृत्तिकाओंको नक्षत्रमण्डलमें स्थानकी प्राप्ति तथा मनुष्योंको कष्ट देनेवाले विविध ग्रहोंका वर्णन  »  श्लोक 43-44h
 
 
श्लोक  3.230.43-44h 
ये च मातृगणा: प्रोक्ता: पुरुषाश्चैव ये ग्रहा:॥ ४३॥
सर्वे स्कन्दग्रहा नाम ज्ञेया नित्यं शरीरिभि:।
 
 
अनुवाद
उपर्युक्त मातृ और पुरुष ग्रहों को सभी देहधारियों को सदैव 'स्कन्दग्रह' के नाम से जानना चाहिए ॥43 1/2॥
 
The maternal and male planets mentioned above should always be known by all embodied humans as 'Skandagraha'. 43 1/2॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)