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श्री महाभारत
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पर्व 3: वन पर्व
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अध्याय 230: कृत्तिकाओंको नक्षत्रमण्डलमें स्थानकी प्राप्ति तथा मनुष्योंको कष्ट देनेवाले विविध ग्रहोंका वर्णन
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श्लोक 39-40h
श्लोक
3.230.39-40h
या जनित्री त्वप्सरसां गर्भमास्ते प्रगृह्य सा॥ ३९॥
उपनष्टं ततो गर्भं कथयन्ति मनीषिण:।
अनुवाद
वह जो अप्सराओं की माता है, वह गर्भ को भी धारण करती है, जिस कारण विद्वान पुरुष कहते हैं कि अमुक स्त्री का गर्भ नष्ट हो गया है। 39 1/2
She who is the mother of Apsaras also holds on to the womb, due to which the wise men say that the womb of a certain woman has been destroyed. 39 1/2
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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