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mahabharat 3.230.35: वह वृक्षों की माता करंज वृक्ष पर निवास करती है। वह वर देने वाली, कोमल और समस्त प्राणियों पर सदैव दया करने वाली है। ॥35॥   |   mahabharat अध्याय 3.230: कृत्तिकाओंको नक्षत्रमण्डलमें स्थानकी प्राप्ति तथा मनुष्योंको कष्ट देनेवाले विविध ग्रहोंका वर्णन   ।   mahabharat पर्व 3: वन पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 3: वन पर्व  »  अध्याय 230: कृत्तिकाओंको नक्षत्रमण्डलमें स्थानकी प्राप्ति तथा मनुष्योंको कष्ट देनेवाले विविध ग्रहोंका वर्णन  »  श्लोक 35
 
 
श्लोक  3.230.35 
पादपानां च या माता करञ्जनिलया हि सा।
वरदा सा हि सौम्या च नित्यं भूतानुकम्पिनी॥ ३५॥
 
 
अनुवाद
वह वृक्षों की माता करंज वृक्ष पर निवास करती है। वह वर देने वाली, कोमल और समस्त प्राणियों पर सदैव दया करने वाली है। ॥35॥
 
She who is the mother of trees resides on the Karanja tree. She is the bestower of boons and is gentle and always shows kindness to all creatures. ॥ 35॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)