श्री महाभारत  »  पर्व 3: वन पर्व  »  अध्याय 230: कृत्तिकाओंको नक्षत्रमण्डलमें स्थानकी प्राप्ति तथा मनुष्योंको कष्ट देनेवाले विविध ग्रहोंका वर्णन  »  श्लोक 34
 
 
श्लोक  3.230.34 
सरमा नाम या माता शुनां देवी जनाधिप।
सापि गर्भान् समादत्ते मानुषीणां सदैव हि॥ ३४॥
 
 
अनुवाद
हे मनुष्यों के स्वामी! कुत्तों की माता, जो देव वंश की है, वह भी मनुष्य स्त्रियों के गर्भ में पल रहे बच्चों का हरण करती है। 34.
 
O lord of men! The mother of dogs, who is of the divine race, Sarma, also always abducts the children in the womb of human women. 34.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)