श्री महाभारत  »  पर्व 3: वन पर्व  »  अध्याय 230: कृत्तिकाओंको नक्षत्रमण्डलमें स्थानकी प्राप्ति तथा मनुष्योंको कष्ट देनेवाले विविध ग्रहोंका वर्णन  »  श्लोक 31
 
 
श्लोक  3.230.31 
कुमाराश्च कुमार्यश्च ये प्रोक्ता: स्कन्दसम्भवा:।
तेऽपि गर्भभुज: सर्वे कौरव्य सुमहाग्रहा:॥ ३१॥
 
 
अनुवाद
हे कुरुणापुत्र! स्कन्द के शरीर से उत्पन्न जिन पुत्र-पुत्रियों का वर्णन किया गया है, वे सभी गर्भ में पल रहे बालकों को खाने वाले महान लोक हैं ॥31॥
 
O son of Kuruṇā! The sons and daughters born from the body of Skanda, which have been described, are all great planets that consume children in the womb. ॥ 31॥
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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