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mahabharat 3.230.26: द्विजश्रेष्ठ! इस ग्रह को 'स्कन्दपाश्मर' कहते हैं। इसी प्रकार अत्यंत भयंकर रूप धारण करने वाले विनता को 'शकुनि ग्रह' कहते हैं। 26॥   |   mahabharat अध्याय 3.230: कृत्तिकाओंको नक्षत्रमण्डलमें स्थानकी प्राप्ति तथा मनुष्योंको कष्ट देनेवाले विविध ग्रहोंका वर्णन   ।   mahabharat पर्व 3: वन पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 3: वन पर्व  »  अध्याय 230: कृत्तिकाओंको नक्षत्रमण्डलमें स्थानकी प्राप्ति तथा मनुष्योंको कष्ट देनेवाले विविध ग्रहोंका वर्णन  »  श्लोक 26
 
 
श्लोक  3.230.26 
स्कन्दापस्मारमित्याहुर्ग्रहं तं द्विजसत्तमा:।
विनता तु महारौद्रा कथ्यते शकुनिग्रह:॥ २६॥
 
 
अनुवाद
द्विजश्रेष्ठ! इस ग्रह को 'स्कन्दपाश्मर' कहते हैं। इसी प्रकार अत्यंत भयंकर रूप धारण करने वाले विनता को 'शकुनि ग्रह' कहते हैं। 26॥
 
Best Dwij! This planet is called ‘Skandapasmar’. Similarly, Vinata, who assumes a very fierce form, is called 'Shakuni Graha'. 26॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)