मार्कण्डेयजी कहते हैं - राजन ! तत्पश्चात् स्कन्द के शरीर से अग्नि के समान तेजस्वी और अत्यन्त तेजस्वी एक पुरुष प्रकट हुआ, जो सम्पूर्ण प्रजा को भक्षण करना चाहता था ॥24॥
Markandeyaji says- Rajan! Thereafter, from Skanda's body appeared a man as bright as fire and extremely radiant, who wished to devour all the human subjects. 24॥
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥