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श्री महाभारत
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पर्व 3: वन पर्व
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अध्याय 230: कृत्तिकाओंको नक्षत्रमण्डलमें स्थानकी प्राप्ति तथा मनुष्योंको कष्ट देनेवाले विविध ग्रहोंका वर्णन
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श्लोक 23
श्लोक
3.230.23
अहं च व: प्रदास्यामि रौद्रमात्मानमव्ययम्।
परमं तेन सहिता: सुखं वत्स्यथ पूजिता:॥ २३॥
अनुवाद
मैं तुम्हें एक भयंकर और अविनाशी पुरुष दूँगा जो मेरा सनातन स्वरूप होगा। उसके साथ आदरपूर्वक रहने से तुम परम सुख भोगोगे॥ 23॥
I will give you a fearsome and indestructible man who will be my eternal form. By living with him with respect, you will enjoy supreme happiness.॥ 23॥
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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