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श्री महाभारत
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पर्व 3: वन पर्व
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अध्याय 230: कृत्तिकाओंको नक्षत्रमण्डलमें स्थानकी प्राप्ति तथा मनुष्योंको कष्ट देनेवाले विविध ग्रहोंका वर्णन
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श्लोक 21
श्लोक
3.230.21
मातर ऊचु:
परिरक्षाम भद्रं ते प्रजा: स्कन्द यथेच्छसि।
त्वया नो रोचते स्कन्द सहवासश्चिरं प्रभो॥ २१॥
अनुवाद
माताओं ने कहा - स्कन्द! हम तुम्हारी इच्छानुसार उन बालकों की अवश्य रक्षा करेंगी। पराक्रमी पुत्र! हम दीर्घकाल तक तुम्हारे पास रहना चाहती हैं।
The mothers said - Skanda! We will definitely protect those children according to your wish. Powerful son! We wish to stay with you for a long time.
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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