श्री महाभारत  »  पर्व 3: वन पर्व  »  अध्याय 230: कृत्तिकाओंको नक्षत्रमण्डलमें स्थानकी प्राप्ति तथा मनुष्योंको कष्ट देनेवाले विविध ग्रहोंका वर्णन  »  श्लोक 20
 
 
श्लोक  3.230.20 
स्कन्द उवाच
प्रजा वो दद्मि कष्टं तु भवतीभिरुदाहृतम्।
परिरक्षत भद्रं व: प्रजा: साधु नमस्कृता:॥ २०॥
 
 
अनुवाद
स्कन्द बोले, "देवियों! आपने इतनी दुःखद बात कही है, फिर भी मैं आपको पूर्व मातृकाओं की संतानें प्रदान करता हूँ; किन्तु आप सब उनकी रक्षा करें; इसी में आपका कल्याण होगा। मैं आपको सादर प्रणाम करता हूँ।"
 
Skanda said, "Ladies! You have said such a sad thing, still I offer you the children of the previous Matrikas; but you all should protect them; this will be good for you. I offer my respectful obeisances unto you.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)