श्री महाभारत  »  पर्व 3: वन पर्व  »  अध्याय 230: कृत्तिकाओंको नक्षत्रमण्डलमें स्थानकी प्राप्ति तथा मनुष्योंको कष्ट देनेवाले विविध ग्रहोंका वर्णन  »  श्लोक 16
 
 
श्लोक  3.230.16 
मातर ऊचु:
यास्तु ता मातर: पूर्वं लोकस्यास्य प्रकल्पिता:।
अस्माकं तु भवेत् स्थानं तासां चैव न तद् भवेत्॥ १६॥
 
 
अनुवाद
माताओं ने कहा - जो जगत् की प्रसिद्ध माताएँ (ब्राह्मी, माहेश्वरी आदि) सम्पूर्ण जगत् की माताएँ हैं, (वे अपना स्थान छोड़ दें।) अब उनके स्थान पर हमारा अधिकार होना चाहिए। उनका उस पर कोई अधिकार नहीं होना चाहिए॥16॥
 
The mothers said - The famous mothers of the world (Brahmi, Maheshwari etc.) who are already established as the mothers of the whole world, (they should leave their position.) Now we should have the right over their place. They should not have any right over it.॥ 16॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)